ह. चरित्र निर्माण की समस्या
From Spiritual India
चरित्र गठन और व्यक्तित्व-निर्माण का कार्य अत्यधिक महत्व का काम है । समर्थता, समृद्घि और प्रगति के सभी प्रयोजन इसी रथ चक्र के आधार पर गतिशील हो सकते है, यह कठिन कार्य परिवार संस्था के अतिरिक्त और किसी के बलबूते का नहीं है । स्कूलों में कुछ भी क्यों न पढ़ाया जाता रहे, घर का वातावरण ही व्यक्ति के गुण, कर्म, स्वभाव को गढ़ने-ढालने में सफल होगा । जो का4य नीति, सदाचार और धर्म अध्यात्म का विशालकाय तंत्र चिरकाल से धूम-धाम और ऊहापोह के सहारे भी कर नहीं पाया, उसे परिवारों का सुधरा हुआ वातावरण देखते-देखते सम्पन्न कर सकता है ।
