स. आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करना
From Spiritual India
सभी के विचार पृथक-पृथक हो सकते है । यदि आपके परिवार के किसी सदस्य के विचार आप से नहीं मिलते और वह अपनी विचारधारारा के अनुसार कार्य करता है, तो उसके मार्ग में रुकावट न डालिये । उदाहरण के लिये मान लीजिए कि आप राम के उपासक है, और आपका पुत्र शिव की उपासना करता है, वह राम को नहीं मानता, तो उसे अपने मन के अनुसार करने दीजिए । आप किसी एक राजनैतिक दल से संबन्ध है और आपका पुत्र किसी अन्य राजनैतिक दल का सदस्य हो जाता है, तो उसके इच्छित कार्य से रुष्ट मत होइए । यदि आप उसके विचारों के प्रति अपना दृष्टिकोण उदार रखेंगें, तो किसी प्रकार के गृह-कलह की संभावना न रहेगी ।
