ल. विवादों का निष्पक्ष निबटारा
From Spiritual India
किसी मामले में आपको मध्यस्थ बनाया जाए, तो आप एकदम सत्यता पर आ जाइये । कोई कितना ही प्रिय हो,यदि उसके द्घारा ज्यादती हुई है तो उसकी ज्यादती की घोषणा कीजिये और जिसकी हानि हुई है, उसके मन को संतोष दीजिए । यदि आप निष्पक्ष न रहें, तो आपको उसका भीषण परिणाम भुगतना पड़ेगा ।
आपका सम्मान इसी में है कि आप सबके विश्वास-भाजन बनें । यदि आप सबको एक समान समझेंगे, तो परिवार के सभी सदस्य आपकी बात मानने में संतोष करेंगे । अनजाने में यदि आप से कभी कोई भूल हो भी जाएगी, तो उसका कोई ख्याल नहीं करेगा और आपकी प्रतिष्ठा ज्यों-की-त्यों बनी रहेगी ।
एक कहावत है कि चार बर्तन होते है, तो खटकते है । अतः घर में कभी कुछ कलह उपस्थित हो जाए, तो उसे मनुष्य स्वभाव की कमजोरी मानकर अधिक भूल मत कीजिए । झगड़ों को शांत करने का एक बहुत बड़ा नुस्खा है – त्याग । यदि आपने किंचित भी त्याग प्रदर्शित किया तो झगड़ा समाप्त होने में देर न लगेगी ।
झगड़ों को युद्घ की-सी चुनौती के रुप में मत मानिए । विपक्षी का दमन करने की बात मत सोचिये । बल्कि झगड़े के कारण पर विचार कीजिए और प्रयत्न कीजिए कि वह कारण दूर हो जाए । यदि ऐसा हो सका तो झगड़ा दूर करने में आपको शीघ्र ही सफलता मिल जाएगी । गृह-कलह को समाप्त करने का यह प्रमुख सिद्घान्त है । इस पर चलकर देखिए और सफलता मिले तो दूसरों को भी इसका उपदेश कीजिए । यदि आप घर में ही अपने पंचशील को सफल न बना सकें, तो बाहर उसकी सफलता की आशा कैसे कर सकेंगें ।
