ल. नारी जागरण की समस्या

From Spiritual India

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नारी उत्थान का कार्य भी पारिवारिक वातावरण में परिवर्तन करने से ही संभव हो सकता है । पुत्र और पुत्री में भेद, पर्दा प्रथा, शिक्षा की उपेक्षा, विवाहों की जल्दी, प्रगति प्रयासों का विरोध, असहयोग, अस्त-व्यस्त ढर्रे में पूरा समय नष्ट होते रहना और प्रगति प्रयासों के लिये समय न मिलना जैसे अवरोध ही नारी की प्रगति में बाधक और अवनति के निमित्त है । इन अनाचारों का परिपोषण एक व्यक्ति नहीं, प्रत्यक्ष और परोक्ष रुप से पूरा पारिवारिक वातावरण ही करता है । नारी उत्थान की समस्या का हल, यदि वस्तुतः करना हो तो उसके लिये प्रचलित पारिवारिक ढर्रे को बदलना अनिवार्य रुप से आवश्यक है ।

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