प्रदॊस व्रत कथा पुजन सामिग्री
Write Comment / 0 commentsNovember 02, 2007, 09:25:39 AM by www.spiritualindia.org
पंचम अध्याय श्री सूतजी ने आगे कहा- 'हे ऋषियों! मैं एक और भी कथा कहता हूँ। उसे भी सुनो। प्रजापालन में लीन तुंगध्वज नाम का एक राजा...
Write Comment / 0 commentsNovember 02, 2007, 09:23:34 AM by www.spiritualindia.org
चतुर्थ अध्याय श्री सूतजी ने आगे कहा- 'वैश्य और उसके जमाई ने मंगलाचार करके यात्रा आरंभ की और अपने नगर की ओर चल पड़े। उनके थोड़ी दूर...
Write Comment / 0 commentsNovember 02, 2007, 09:22:45 AM by www.spiritualindia.org
तृतीय अध्याय :- श्री सूतजी ने कहा- 'हे श्रेष्ठ मुनियों! अब एक और कथा कहता हूँ। पूर्वकाल में उल्कामुख नाम का एक बुद्धिमान राजा ...
Write Comment / 0 commentsNovember 02, 2007, 09:22:06 AM by www.spiritualindia.org
सूतजी ने कहा- 'हे ऋषियों! जिन्होंने पहले समय में इस व्रत को किया है। उनका इतिहास कहता हूँ आप सब ध्यान से सुनें। सुंदर काशीपुरी न...
Write Comment / 0 commentsNovember 02, 2007, 09:21:05 AM by www.spiritualindia.org
पुजन सामिग्री
Write Comment / 0 commentsNovember 02, 2007, 09:20:06 AM by www.spiritualindia.org
विधि – इस व्रत को करने वाला कथा कहते वे सुनते समय हाथ में गुड़ व भुने हुए चने रखें । सुनने वाला सन्तोषी माता की जय । सन्तोषी मात...
Write Comment / 0 commentsNovember 02, 2007, 06:35:18 AM by www.spiritualindia.org
व्रत माहात्म्य एवं विधि इस व्रत को करने से समस्त इच्छएं पूर्ण होती है और वृहस्पति महाराज प्रसन्न होते है । धन, विघा, पुत्र तथा म...
Write Comment / 0 commentsNovember 02, 2007, 06:34:12 AM by www.spiritualindia.org
विधि – ग्रह शान्त तथा सर्व-सुखों की इच्छा रखने वालों को बुधवार का व्रत करना चाहिये । इस व्रत में रात दिन में एक ही बार भोजन करना...
Write Comment / 0 commentsNovember 02, 2007, 06:32:16 AM by www.spiritualindia.org
एक बुढ़िया थी, वह मंगल देवता को अपना इष्ट देवता मानकर सदैव मंगल का व्रत रखती और मंगलदेव का पूजन किया करती थी । उसका एक पुत्र था ...
Write Comment / 0 commentsNovember 02, 2007, 06:31:43 AM by www.spiritualindia.org
विधि – सर्व सुख, रक्त विकार, राज्य सम्मान तथा पुत्र की प्राप्ति के लिये मंगलवार का व्रत उत्तम है । इस व्रत में गेहूँ और गुड़ का ...
Write Comment / 0 commentsNovember 02, 2007, 06:30:58 AM by www.spiritualindia.org
कथा – मृत्यु लोक में विवाह करने की इच्छा करके एक समय श्री भूतनाथ महादेव जी माता पार्वती के साथ पधारे वहाँ वे ब्रमण करते-करते विद...
Write Comment / 0 commentsNovember 02, 2007, 04:25:10 AM by www.spiritualindia.org
विधि – सोमवार का व्रत साधारणतया दिन के तीसरे पहर तक होता है । व्रत में फलाहार या पारण का कोई खास नियम नहीं है । किन्तु यह आवश्यक...
Write Comment / 0 commentsNovember 02, 2007, 04:24:09 AM by www.spiritualindia.org
विधि - सर्व मनोकामनाओं की पूर्ति हेतु रविवार का व्रत श्रेष्ठ है । इस व्रत की विधि इस प्रकार है । प्रातःकाल स्नानादि से निवृत्त ह...
Write Comment / 0 commentsNovember 02, 2007, 04:23:30 AM by www.spiritualindia.org
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